Your appointment is live now

Small Uterus (छोटा गर्भाश्य)

छोटा गर्भाश्य अथवा अनुपस्थित गर्भाश्य

बच्चा उत्पन करने की क्षमता नहीं; फिर भी माँ बनने की आकाँक्षा, कैसे संभव?






गर्भाश्य  अथवा बच्चेदानी शरीर का वह अंग है जहाँ भ्रूण का निर्माण एवं शिशु का विकास होता है! उन महिलाओं के दुःख एवं निराशा का क्या, जिनके या तो छोटे गर्भाश्य हैं जिसमे सम्पूर्ण भ्रूण का विकास नहीं हो पाता और गर्भपात हो जाता है या फिर जन्म से ही जिसकी बच्चेदानी अविकसित अथवा अनुपस्थित है!

 

क्या है छोटा गर्भाश्य और इसे कैसे पहचाना जाता है ?

गर्भाश्य का औसत आकार 7.5 सेमी लम्बा,  5.0 सेमी चौड़ा तथा 2.5 सेमी गहरा होता है! छोटा अथवा हाइपोप्लास्टिक गर्भाश्य जन्म के समय गर्भ का पूर्ण विकास ना होने की वजह से होता है! कुछ बच्चियों में युवावस्था से पूर्ण प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन के अधिक स्त्राव से गर्भाश्य का विकास रुक जाता है अथवा गुणसूत्र विसंगति के कारण होने वाला टर्नर सिंड्रोम नामक बीमारी की वजह से अविकसित गर्भाश्य की समस्या होती है!

मुलेरियन अजनन (Mullerian Agenesis) अथवा MRKH नामक सिंड्रोम एक जन्मजात विकृति की वजह से मुलेरियन वाहिनी (Mullerian Duct) का निर्माण ना होने की वजह से गर्भाश्य अनुपस्थित होता है!

छोटे गर्भाश्य वाली महिलाओं को सामान्यत: माहवारी नहीं होती, जिसे प्राथमिक एमेनोरिया कहा जाता है! माध्यमिक यौन विशेषता और अण्डग्रन्थि का सामान्य संचालन होता है! परन्तु गर्भधारण में परेशानी होती है! यदि गर्भ ठहर जाता है तो आकस्मिक गर्भपात की प्रबल सम्भावना होती है! छोटे गर्भाश्य का आंकलन 2D स्कैन, 3D स्कैन, एमआरआई और दूरबीन विधि से किया जाता है!

सरोगेसी अथवा किराये की कोख ऐसे दम्पतियों के लिए वरदान है जहाँ महिला को गर्भाश्य सम्बन्धी समस्या है!

महिला के स्वयं के अंडो और पुरुष के शुक्राणुओं से तैयार भ्रूण को IVF पद्धति से तैयार कर एक दूसरी महिला जिसे सरोगेट कहते हैं, के गर्भ में स्थापित किया जाता है! सफल IVF पद्धति से इस विधि द्वारा स्वस्थ संतान का सपना पूरा हो सकता है!


You can compare max 4 products.